
इंडियन हैडलाइन न्यूज़/ भंडारा प्रतिनिधि
क्यों कर कोई दहेज देगा तुम्हें।
पढ़ा लिखा कर काबिल बनाकर अपनी बेटी सौंपा है तुम्हें।
फिर क्यों कर लाज न आती तुम्हें।
जो भिखारी की तरह दहेज मांगने चले आते हो।
संस्कारी लड़की पाकर भी हर पल उसे सताते हो।
उस पर जुल्म तुम ढाते हो।
क्या बहू की सूरत में अपनी बेटी की मूरत न नजर आती तुम्हें।
मंजू की लेखनी का है यही कहना।
संस्कार ही तो है बहू बेटियों का गहना।
इसलिए जब भी कोई दहेज मांगे तुमसे।
उस घर में अपनी बेटी न ब्याहना अबसे।
आत्मनिर्भर जो अपनी बिटिया को बनाओगे।
दहेज देने से फिर सभी कतराओगे।
अपनी सुरक्षा अपनी बेटी को खुद करती पाओगे।
लोगों के जुल्म से तभी तुम उसे बचा पाओगे।
फिर सर उठा कर सभी यह कह पाओगे।
जहां दहेज वहां होगी शादी नहीं।
आत्मनिर्भर है हमारी बेटी कोई अब हमारी मजबूरी नहीं।।
स्वरचित: मंजू अशोक राजाभोज,भंडारा (महाराष्ट्र)
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