
इंडियन हैडलाइन न्यूज़ नेटवर्क/ कटिहार प्रतिनिधि
जीवनी: डॉ काशी प्रसाद जायसवाल का जन्म 27 नवंबर 1881 को उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में हुआ था। उनकी मृत्यु 4 अगस्त 1937 को हुई थी। वे एक प्रसिद्ध इतिहासकार, मुद्राशास्त्री, कानून विद और राष्ट्रवादी लेखक थे। उनका कार्यक्षेत्र भारतीय इतिहास और संस्कृति था और वे एक सफल वकील भी थे।
तर्क: डॉ काशी प्रसाद जायसवाल को भारत रत्न मिलना चाहिए, क्योंकि:– वे चीनी सहित 21 भाषाओं के विद्वान थे और उनकी विद्वता ने उन्हें एक अद्वितीय व्यक्ति बनाया।– वे एक प्रसिद्ध कानून विद थे और उनकी कानून की समझ ने उन्हें एक महान वकील बनाया।– वे एक मुद्राशास्त्री थे और उनकी मुद्राशास्त्र की समझ ने उन्हें एक महान इतिहासकार बनाया।– वे एक इतिहासकार थे और उनकी इतिहास की समझ ने उन्हें एक महान राष्ट्रवादी लेखक बनाया।– वे एक राष्ट्रवादी लेखक थे और उनकी लेखनी से स्वतंत्रता आंदोलन की अलख जगाते थे।– उनकी लेखनी ने लोगों को स्वतंत्रता के लिए प्रेरित किया और उन्हें एक महान विचारधारा के पोषक के रूप में जाना जाता है।
हजारी प्रसाद द्विवेदी ने उनके बारे में कहा था कि “वे एक महान विद्वान और राष्ट्रवादी थे जिन्होंने अपने जीवन को भारत की सेवा में समर्पित कर दिया था”। राहुल सांकृत्यायन ने भी उनकी विद्वता और योगदान की प्रशंसा की थी। अंग्रेजों ने उन्हें “डेंजरस रेवोलूशनरी” कहा था, जो उनके राष्ट्रवादी विचारों की गहराई को दर्शाता है। उनकी लेखनी और विचारों ने अंग्रेजों को चिंतित किया था और उन्हें एक खतरनाक व्यक्ति के रूप में देखा जाता था।
इसके अलावा, डॉ काशी प्रसाद जायसवाल की आदम कद प्रतिमा पटना के प्रमुख स्थान पर लगाना भी एक महत्वपूर्ण श्रद्धांजलि होगी, जिससे उनकी विद्वता और योगदान को और अधिक प्रसिद्धि मिलेगी।इसके अलावा, पटना विश्वविद्यालय का नाम डॉ काशी प्रसाद जायसवाल के नाम पर रखना भी एक उचित श्रद्धांजलि होगी, क्योंकि उन्होंने पटना विश्वविद्यालय में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके अलावा, पटना में एक प्रमुख सड़क का नाम डॉ काशी प्रसाद जायसवाल के नाम पर रखना भी एक उचित श्रद्धांजलि होगी, जिससे उनकी याद में एक महत्वपूर्ण स्थल बनेगा।
निष्कर्ष: डॉ काशी प्रसाद जायसवाल की विद्वता और योगदान को देखते हुए, भारत रत्न से सम्मानित करना, पटना विश्वविद्यालय का नाम उनके नाम पर रखना, आदम कद प्रतिमा लगाना और सड़क का नामकरण करना एक उचित श्रद्धांजलि होगी। उनकी रचनाएं और योगदान आज भी प्रासंगिक हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन होंगे।
प्रस्तुति: ©अशोक कुमार चौधरी “प्रियदर्शी”* द्वारा प्रस्तुत।





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