
गोंदिया: जब १४ वर्षिय डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का विवाह माता रमाबाई आंबेडकर से संपन्न हुआ, तो उनकी उम्र मात्र ९ वर्ष थी और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर पांचवी अंग्रेजी कक्षा में पढ़ रहे थे। शिक्षा के लिए डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर १९१३ से १९१६ तक अमरिका और बाद में लंदन में रहे। लेकिन रमाबाई ने कभी अपनी व्यक्तिगत अडचनों तकलीफो का जिक्र बाबासाहेब न करते हुए, उन्हें पुरा ध्यान शिक्षा पर देने के लिए प्रेरित किया। बाबासाहेब आंबेडकर के महामानव होने के सफर में, माता रमाबाई आंबेडकर का सर्वाधिक योगदान रहा है, जिसे स्वंय बाबासाहेब ने लिखित रुप से मान्य किया है कि, “रमाबाई आंबेडकर के अद्वितीय आत्मत्याग” के बिना वे विदेश में शिक्षा पुरी नहीं कर पाते। रमाबाई आंबेडकर त्याग की मुरत है, ऐसे उद्गार प्रफुल गोपालदास अग्रवाल ने छोटा गोंदिया में आयोजित रमाबाई आंबेडकर के जयंती उत्सव के पर्व पर व्यक्त किये।
उन्होंने आगे कहा कि, जब रमाबाई आंबेडकर ने धारवाड़ स्थित छात्रावास का दौरा किया और पाया कि, छात्रों के लिए अन्न की कमी है, उन्होने बिना समय गवाए अपने आभुषण तक दे दिए, जिन्हें विक्री कर छात्रों के लिए राशन खरीदा गया, उन्होने न केवल छात्रों की आर्थिक मदत की, बल्कि खुद वहां रहकर छात्रों के लिए भोजन बनाया और कहा कि “गहनों से किमती मेरी बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य है” जिसके बाद धारवाड़ से माता रमाबाई का नाता हमेशा के लिए जुड़ गया और आज भी धारवाड़ में माता रमाबाई आंबेडकर के नाम पर ऑर्ट एण्ड कॉमर्स कॉलेज चल रही है, उन्हें त्यागमुर्ती कहा जाता है, क्योकि उन्होंने समाज के भविष्य के लिए अपनी आखरी जमापुंजी तक कुर्बान कर दी थी, वे हमारी प्रेरणास्त्रोत है।
प्रमुख रूप से शहर कॉग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी, शहर कॉग्रेस महसचिव मनोज पटनायक, कमल पुरोहित, आशिष मेश्राम, लोकेश रहांगडाले, संतोष कुसराम, पुर्व पार्षद विष्णु नागरीकर, रुपाली उके, रेवतीबाई दगड़े, गोल्डी गांवडे, पुर्व पार्षद भागवत मेश्राम, देवा रुसे, अनिल सहारे, संजय ओकटे, आलोक मोहंती आदि उपस्थित थे।





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