
गोरखपुर: केंद्र सरकार के गृहमंत्री अमित शाह जी व भारत सरकार के महालेखाकार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण से मांग है कि जनगणना मे एक कालम और बढाई जाय 28 कालम की जगह 29 कालम की जाय तथा पिछड़े समाज के सभी संगठनों के लोगों से अनुरोध है कि अपने-अपने संगठनो के माध्यम से गृहमंत्री एवं भारत सरकार के महालेखाकार एवं जनगणना आयुक्त से मांग करें कि जाति-आधारित जनगणना हेतु पहले नंबर पर सवर्ण, पिछड़ा, दलित,आदिवासी के लिए अलग से कालम बनाई जाय जिसमे सभी चारों वर्ण की जनसंख्या दर्ज की जाय | भारत सरकार के महालेखाकार एवं जनगणना आयुक्त ने अधिसूचना दिनांक 16जून 2025 को जारी की है| किन्तु गृह मंत्रालय के प्रवक्ता के द्वारा यह घोषणा की गई है कि जनगणना के साथ ही जाति-आधारित जनगणना भी कराई जाएगी जो अखबारों में प्रकाशित है किंतु प्रवक्ता का नाम अंकित नहीं की गई है जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने घोषणा किया था कि जाति-आधारित जनगणना कराई जाएगी किंतु आधिसूचना जारी नहीं हुई है| जाति आधारित जनगणना कराने के लिए भी अधिसूचना भी जारी की जाय| जनगणना के समय घरों की सूची में 34 कालम के अंतर्गत डाटा एकत्र किया जाएगा एवं जनसंख्या जनगणना में 28 कालम होंगे जिनमें व्यापक जनसंख्या की सामाजिक और आर्थिक डाटा एकत्र होगा 28 कालम से 29 कालम की जाय| 1.नम्बर पहले कालम मे सवर्ण (क) पिछड़ा (ख )दलित( ग ) आदिवासी ( घ ) जाति-आधारित जनगणना करते समय पहला सवाल यह पूछा जाय कि आप सवर्ण है, पिछड़े है, दलित है, आदिवासी है, जो वह बताये वह दर्ज की जाय 1.पहले नम्बर कालम मे सवर्णो मे जितनी जातियाँ उन सभी जातियों की अलग-अलग जनसंख्या दर्ज की जाय इसी प्रकार से पिछड़े दलित आदिवासियों की भी सभी जातियों की अलग-अलग जनसंख्या दर्ज की जाय जो सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो जाय | उक्त ब्यान अखिल भारतीय कलवार कलाल कलार जायसवाल महासभा के राष्ट्रीय महासचिव ध्रुवचन्द जायसवाल ने लिखित में जारी किया!
ध्रुवचन्द जायसवाल ने कहा कि मानसून सत्र के दौरान सत्ता व विपक्ष के पिछड़े दलित आदिवासी मा सांसदों से अनुरोध किया जायेगा कि जाति-आधॎरित जनगणना के लिए अध्यादेश जारी करने की मांग करें| स्मरण रहे कि 1931 के जनगणना के अनुसार पिछड़ों की जनसंख्या 52% था किन्तु मात्र 27% प्रतिशत तक ही आरक्षण मिला है उच्च शिक्षण संस्थानों एवं उच्च चिकित्सा संस्थानों मे पिछड़ों की संख्या नग्ण है कहीं-कहीं महत्वपूर्ण विभागों मे भी पिछड़ों की संख्या 27% प्रतिशत से बहुत कम है| इसलिए पिछड़े समाज के कई संगठनों व्दारा कई दशकों से जाति-आधारित जनगणना की मांग कर रहे थे|किन्तु अधिसूचना जारी नही होने से खासकर पिछड़ों मे संशय/उहापोह की स्थिति उत्पन्न हो रही है इसलिए केन्द्र सरकार शीघ्र जाति आधारित जनगणना की भी अधिसूचना जारी करा देनी चाहिए|
ध्रुवचन्द जायसवाल, राष्ट्रीय महासचिव





Total Users : 883087
Total views : 6488521
